नई दिल्ली: गर्मियों के मौसम में पाचन संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ जाती हैं। गैस, अपच, कब्ज और पेट फूलने जैसी परेशानियों से राहत पाने के लिए लोग अक्सर पपीता खाने की सलाह देते हैं। आयुर्वेद से लेकर आधुनिक चिकित्सा विज्ञान तक, पपीते को पाचन तंत्र के लिए बेहद फायदेमंद माना गया है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि इसका पूरा लाभ तभी मिलता है, जब इसे सही समय और सही मात्रा में खाया जाए।
आयुर्वेद विशेषज्ञ आचार्य बालकृष्ण के अनुसार, रोजाना करीब 100 ग्राम पका हुआ पपीता खाली पेट खाने से पेट और आंतों में जमा मल बाहर निकालने में मदद मिल सकती है। जिन लोगों को कब्ज, गैस या पाचन संबंधी दिक्कत रहती है, उनके लिए इसका नियमित सेवन लाभकारी माना जाता है।
पपीता पेट के लिए कैसे करता है काम?
आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के अनुसार पपीते में मौजूद फाइबर, पानी और विशेष एंजाइम पाचन प्रक्रिया को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। यह भोजन को आसानी से पचाने में मदद करता है और आंतों की कार्यप्रणाली को भी सक्रिय बनाए रखता है।
पेपेन एंजाइम से आसान होता है पाचन
पपीते में पेपेन और काइमोपेपेन जैसे एंजाइम पाए जाते हैं, जो प्रोटीन को तेजी से छोटे-छोटे अमीनो एसिड में बदलने में मदद करते हैं। शोध के अनुसार, जब मीट, दाल या डेयरी जैसे भारी प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थ खाए जाते हैं, तो इन्हें पचाने में पेट को अधिक मेहनत करनी पड़ती है। ऐसे में पपीते के एंजाइम भोजन को जल्दी पचाने में सहायता करते हैं, जिससे गैस, ब्लोटिंग और एसिडिटी की समस्या कम हो सकती है।
आंतों की गति बढ़ाने में भी मददगार
पपीते में घुलनशील फाइबर और पर्याप्त मात्रा में पानी मौजूद होता है। यह मल को मुलायम बनाता है और आंतों की प्राकृतिक गति को बढ़ावा देता है। इससे कब्ज की समस्या में राहत मिल सकती है और मल त्याग की प्रक्रिया आसान हो जाती है।
कब्ज और आईबीएस में भी मिल सकता है फायदा
कुछ क्लिनिकल अध्ययनों के अनुसार, नियमित रूप से पका हुआ पपीता या उसका अर्क लेने से कब्ज और इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) से जूझ रहे लोगों में सुधार देखा गया है। पपीते में मौजूद विटामिन-सी और बीटा-कैरोटीन जैसे एंटीऑक्सीडेंट आंतों की सूजन कम करने में भी मदद कर सकते हैं।
गर्मियों में पपीता खाने का सही समय क्या है?
आयुर्वेद के अनुसार पपीते की तासीर गर्म मानी जाती है। इसलिए गर्मियों में इसका सेवन सही समय पर करना जरूरी होता है। विशेषज्ञों के मुताबिक सुबह 9 बजे से 11:30 बजे के बीच पपीता खाना सबसे उपयुक्त माना जाता है। यदि कब्ज या पाचन संबंधी समस्या हो तो सुबह गुनगुना पानी पीने के लगभग आधे घंटे बाद सीमित मात्रा में इसका सेवन किया जा सकता है।
रात में पपीता खाने से क्यों बचने की सलाह दी जाती है?
आयुर्वेद के अनुसार रात के समय पपीता खाने से बचना चाहिए। माना जाता है कि इस समय पाचन प्रक्रिया अपेक्षाकृत धीमी रहती है और पपीते की तासीर कुछ लोगों में भारीपन या असहजता पैदा कर सकती है। इसलिए बेहतर परिणाम के लिए इसका सेवन दिन के समय ही करना उचित माना जाता है।
